Saturday, June 22, 2024
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    पहली बार डॉलर के मुकाबले रुपया 80 के पार,  भारतीय रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा

    अमरीकी डॉलर के सापेक्ष भारतीय रुपया अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, यही वजह है कि  शेयर मार्केट में भी जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है। आज 0.25 रुपये की गिरावट के साथ ही रुपया की कीमत 81.09 रुपया प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया, जो कि रुपये की अब तक की सबसे कमजोर स्थिति है।

    23 सितंबर, शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के सापेक्ष रुपया में 41 पैसे की गिरावट आयी, जिसके परिणाम स्वरूप डॉलर के मुकाबले सबसे निचले स्‍तर पर पहुंच गया। बीते गुरूवार को अमेरिकी डॉलर के सापेक्ष भारतीय रुपया भारी गिरावट के साथ 80.86 रुपए के स्तर पर बंद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 24 फरवरी के बाद बीते दिन गुरुवार को रुपया में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली।

    मार्केट एक्सपर्ट की माने तो निकट भविष्य में भी रुपया का यह स्तर बरकरार रहेगा।  इस वर्ष अमेरिकी डॉलर के सापेक्ष भारतीय रुपए में अबतक कुल 8.48% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अमरीकी ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि के परिणाम स्वरूप 10 वर्षों की बॉन्ड यील्ड में 6 बेसिक प्वाइंट बढ़कर पिछले 2 माह के उच्चतम स्तर है।

    मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार अमरीका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि करने और आगे जारी रखने के स्पष्ट संकेत से निवेशक प्रभावित है। और इसी के कारण दुनिया भर की मुद्रा में गिरावट दिख रही है। इसका एक और कारण रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते तनाव है जिसके वजह से निवेशक रिस्क लेने से बच रहे हैं, और यही वजह है की अमरीकी मुद्र में मजबूती और भारत समेत अन्य देशों की करेंसी में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है।

    वहीं अगले सप्ताह में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति जारी किया जाएगा, यह दिलचस्प होगा। सीआर फॉरेक्स के एडवाइजर्स ने कहा कि भारतीय रुपया में आयी गिरावट को भारतीय रिजर्व बैंक नहीं रोक सका क्योंकि बैंकिंग प्रणाली भी वर्तमान में बुरे दौर से गुजर रही है। और ऐसी स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप से ब्याज दरों में वृद्धि होगी, जिससे बैंकिंग प्रणाली की स्थिति और भी खराब होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।

    इस सप्ताह के अंत में शेयर बाजार में भी लगातार गिरावट दर्ज की गई है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में अभी 1.04%, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में 1.15% की गिरावट आयी है। इन आकड़ों का स्तर सुबह 11.15 बजे की है, अभी बाजार खुला है और बंद होने तक उतार-चढ़ाव की स्थिति निरंतर जारी रहेगी।

    भारतीय रुपए के टूटने से हमारे जेब पर भी असर पड़ेगा और इसके परिणाम स्वरूप जो समान विदेशों से आयात करने पर कम लागत आती थी वही वस्तु अब आयात करने पर ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत डॉलर में तय होने से देश में तेल का भी मूल्य बढ़ जाती हैं। इस कारण आयातित समान और अधिक महंगा होता ही है साथ ही लॉजिस्टिक्स भी महंगे हो जाते हैं और देश में महंगाई बढ़ती है।

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