Friday, June 14, 2024
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    पीएम मोदी ने की गतिशक्ति योजना की शुरूआत

    प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के लिए 100 लाख करोड़ रुपये के राष्ट्रीय मास्टर प्लान की शुरुआत की, जिसका उद्देश्य रसद लागत को कम करना और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे का विकास करना है।

    योजना के शुभारंभ पर बोलते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना का लक्ष्य रसद की लागत को कम करना, कार्गो हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि करना और कार्यान्वयन में गति लाना है।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर जोड़कर परियोजनाओं को अधिक शक्ति और गति प्रदान करना है, और विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों की बुनियादी ढांचा योजनाओं को एक समान दृष्टि से बनाया और कार्यान्वित किया जाएगा.

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूर्व में विकास कार्यों में सुस्ती से करदाताओं के पैसे का सदुपयोग नहीं हुआ और विभाग अलग-अलग काम करते थे, परियोजनाओं को लेकर उनके बीच तालमेल नहीं था. गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचे के बिना विकास संभव नहीं है और सरकार ने अब इसे समग्र रूप से विकसित करने का संकल्प लिया है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गतिशक्ति मास्टर प्लान सड़कों से लेकर रेलवे, विमानन से लेकर कृषि तक की परियोजनाओं के समन्वित विकास के लिए विभिन्न विभागों को जोड़ता है। भाजपा सरकार के तहत भारत जिस गति और पैमाने को देख रहा है, वह आजादी के पिछले 70 वर्षों में कभी नहीं देखा गया था।

    और बताया कि पहली अंतर्राज्यीय प्राकृतिक गैस पाइपलाइन 1987 में चालू की गई थी। तब से 2014 तक 15,000 किमी. प्राकृतिक गैस पाइपलाइन का निर्माण किया गया था। वर्तमान में, 16,000 किमी. से अधिक नई गैस पाइपलाइनों का निर्माण किया जा रहा है। और “हमने 27 साल में जो किया है, हम आधे से भी कम समय में कर रहे हैं।”

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 तक में भाजपा सरकार के सत्ता में आने के पहले पांच साल में 1,900 किमी. रेल लाइन को दोगुनी की गई थी, जबकि भाजपा के शासनकाल में पिछले सात सालों में 9,000 किमी. रेल लाइन का दोहरीकरण कार्य किया गया. 2015 में 250 किमी. से मेट्रो रेल नेटवर्क अब 700 किमी. हो गया है और 1,000 किमी. पर काम चल रहा है।

    पिछले सात वर्षों में 1.5 लाख ग्राम पंचायतों को ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क से जोड़ा गया है जबकि 2014 से पहले के पांच वर्षों में केवल 60 ग्राम पंचायतों में ही यह सुविधा थी.

    बंदरगाह के क्रियान्वयन का समय 41 घंटे से घटाकर 27 घंटे कर दिया गया है और इसे और कम करने के प्रयास जारी हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 से पहले, पिछले सात वर्षों में 4.25 लाख सर्किट किमी. के मुकाबले पांच साल में तीन लाख सर्किट किमी. बिजली पारेषण लाइनें बिछाई गईं। और अक्षय ऊर्जा के मामले में भी काफी विस्तार हुआ है।

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