Tuesday, June 25, 2024
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    इसी हफ्ते मिल सकती है कोवैक्सिन को WHO की मंजूरी;

    भारत के स्वदेशी कोरोना टीके कोवैक्सिन को WHO मंजूरी दे सकता है। इसका प्रोडक्शन भारत बायोटेक कर रही है। WHO के इस कदम से भारत सहित दुनिया के कई देशों में कोवैक्सिन लगवाने वाले लोगों को सहुलियत मिलेगा।

    WHO का अप्रूवल न देने के कारण कोवैक्सिन लगवाने वाले लोगों को विदेश यात्रा करने की अनुमती नहीं मिलती थी, फिलहाल मंजूरी मिलने के पश्‍चात इसे वैक्सीन पासपोर्ट के जैसे प्रयोग किया जा सकेगा। और भारत बायोटेक इस वैक्सीन को दुनियाभर में बिना किसी व्‍यवधान के एक्सपोर्ट भी कर पाएगी। भारत बायोटेक ने अप्रूवल के लिए WHO-जिनेवा में एप्लीकेशन दी थी। वैसे कोवैक्सिन को अब तक 13 देशों ने अपनी मंजूरी दे चुके हैं।

    WHO की इमरजेंसी यूज लिस्टिंग द्वारा महामारी जैसी पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी में हेल्थ प्रोडक्ट की सेफ्टी और इफेक्टिवनेस को जांच करता है। और फिर अप्रूवल देता है। WHO द्वारा फाइजर की वैक्सीन को 31 दिसंबर 2020 को, ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन को 15 फरवरी 2021 को और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन को 12 मार्च 2021 को इमरजेंसी यूज के अंतर्गत अप्रूवल दिया गया था।

    WHO के की माने तो आपात स्थिति को देखते हुए जल्द से जल्द दवा, वैक्सीन और डायग्नोस्टिक टूल्स विकसित करना और अप्रूव करना आवश्‍यक होता है। वह भी सेफ्टी, एफिकेसी और क्वालिटी के मानकों का ध्‍यान रखते हुए। यह असेसमेंट महामारी के दौरान व्यापक स्तर पर लोगों के लिए इन प्रोडक्ट्स की उपयोगिता को सुनिश्चित करता है।

    फिलहाल WHO की अप्रूवल सूची में 7 वैक्‍सीनों को जगह मिली है, जिनके नाम इस प्रकार हैं – मॉडर्ना, फाइजर, एस्‍ट्राजेने, जैनसेन, कोरोनावैक, कोवीशील्‍ड एवं सिनोफॉर्म BBIBP हैं और अब कोवैक्‍सीन, जो कि आठवीं हो सकती है।

    भारत बायोटेक और ICMR ने कोवैक्सिन को विकसित किया है। फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल्स के बाद कंपनी का दावा था कि यह कोरोना से बचाव में 78% कारगर है। जिन्हें ट्रायल्स में यह वैक्सीन लगाई गई थी, उनमें से किसी में भी गंभीर लक्षण नहीं दिखे। यानी गंभीर लक्षणों को रोकने के मामले में यह 100% कारगर सिद्ध हुआ है।


    ICMR का दावा है कि यह वैक्सीन सभी तरह के वैरिएंट्स पर कारगर सिद्ध होगा है। यानी न केवल UK, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीकी के वैरिएंट्स पर भी यह वैक्‍सीन पूरी तरह से प्रभावी तो है ही भारत के 10 से अधिक राज्यों में सामने आए डबल म्यूटेंट वैरिएंट पर भी इसका प्रभाव स्‍पष्‍ट हुई है। अत: यह सुरक्षा की दृष्टि से उत्‍तम माध्‍यम है जो कोरोना से बचाव में कारगर सिद्ध होगा।

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